अनजानी सलाह हिंदी कहानी Anjani Salah Hindi Motivational Story | Hindigk50k

अनजानी सलाह हिंदी कहानी Anjani Salah Hindi Motivational Story

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अनजानी सलाह हिंदी कहानी Anjani Salah Hindi Motivational Story

एक दिन घनघोर वर्षा हो रही थी. मेघों की भयानक गर्जना ने उस शाम के वातावरण को और भयावह बना दिया था. एक अधेड़ दम्पत्ति झोंपड़ी में बैठे दुःख-सुख की बातें कर रहे थे.

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अचानक किसी ने दरवाजा खटखटाया और आवाज दी. – “अन्दर कोई है क्या?” किसान ने दरवाजा खोलकर देखा तो सामने आत्मविश्वास से भरा बीस-इक्कीस वर्ष का कोई युवक खड़ा था. वर्षा में उसके कपड़े पूरी तरह से भीग चुके थे. वह बहुत थका लग रहा था. उसकी वेशभूषा और लटकती तलवार से लगता था कि वह सिपाही है.

किसान ने उससे पूछा – “क्या बात है भाई?”

युवक बोला – “मैं एक राही हूँ. मार्ग भटक गया हूँ. वर्षा में बुरी तरह भीग गया हूँ. मैं और मेरा घोड़ा बुरी तरह थक गए हैं. आज की रात बिताने के लिए जगह चाहिए.”

नवयुवक को आसरा मिल गया. किसान की पत्नी ने उसे बदलने के लिए कपड़े दिए. भीगे वस्त्रों को आग के पास टाँग दिया जिससे वे जल्दी सूख जाएँ. किसान ने घोड़े को आँगन में बाँध दिया और खाने के लिए चारा दे दिया.

किसान की पत्नी ने युवक से पूछा – “भूख लगी होगी, कुछ खाना खा लो.”
युवक ने कहा – “नहीं, नहीं, मैं खाना नहीं खाऊँगा. मैं सोना चाहता हूँ.”
किसान बोला – “यह नहीं हो सकता. हम गरीब अवश्य हैं, लेकिन घर आए अतिथि को भूखा थोड़े ही सोने देंगे. जो कुछ रूखा-सूखा हम खाते हैं, वही तुम भी खा लो.”

युवक इस प्रेम भरे आग्रह को टाल न सका. किसान की पत्नी ने युवक तथा किसान के आगे केले के पत्तल लगा दिए. पत्ते पर भात परोसा और वह कढ़ी लाने गई. स्त्री ने भात पर कढ़ी परोसी तो वह पत्तल पर बहने लगी. युवक उसे एक ओर से रोकता तो वह दूसरी ओर से बहने लगती. युवक की समझ में नहीं आ रहा था कि वह कढ़ी को रोकने के लिए क्या करे?

उस युवक की परेशानी देखकर किसान की पत्नी को हँसी आ गई और वह बोली – “तुम तो शिवाजी की तरह बुद्धू हो.” फिर उसने उसे समझाते हुए कहा – “भात में कढ़ी लेने से पहले गड्ढा कर लेना चाहिए. नहीं तो कढ़ी रुक नहीं सकती, तुम्हें इतना भी नहीं मालूम?”

युवक बोला – “मुझे तो कढ़ी-भात खाना नहीं आता, इसलिए मैं तो बुद्धू हूँ, लेकिन यह शिवाजी कौन है? उसे आप बुद्धू क्यों कहती हैं?”

किसान की पत्नी बोली – “शिवाजी महाराष्ट्र पर अपना राज्य कायम करना चाहता है, इसलिए सुल्तान से लड़ता है. वह बहादुर तो बहुत है, लेकिन उसकी लड़ाई का तरीका गलत है.”
“तरीका गलत है, वह कैसे?” – युवक ने पूछा.

स्त्री बोली – “शिवाजी गाँव पर कब्जा तो कर लेता है, परन्तु किलों पर अधिकार नहीं करता है. सुल्तान के सैनिक मौका मिलते ही किले से निकलते हैं और मारधाड़ करते हैं. फिर शिवाजी को पीछे हटना पड़ता है. वह यह नहीं समझता कि स्वराज्य कायम करना है तो पहले किलों पर कब्जा करना चाहिए.”

युवक बोला – “किलों पर कब्जा करना आसान नहीं है और इसमें समय भी लगता है.”
स्त्री ने कहा – “ठीक है, परन्तु किलों पर कब्जा करना आवश्यक है. किलों पर कब्ज़ा किए बिना स्वराज्य कायम नहीं किया जा सकता. जैसे भात में गड्ढा किए बगैर कढ़ी बह जाती है, उसी प्रकार किलों के बिना प्रदेश भी हाथ से निकल जायेगा. जिसके पास किले होंगे, उसी का महाराष्ट्र पर शासन होगा.”
युवक को स्त्री की बात समझ में आ गई. वह सुबह उठकर चला गया.

इस घटना को हुए कई वर्ष बीत गए. किसान दम्पत्ति अब वृद्ध हो गए थे. महाराष्ट्र में शिवाजी का शासन कायम हो गया था. उनके राज्याभिषेक की तैयारियाँ हो रही थीं. एक दिन बूढ़ा किसान अपनी झोंपड़ी के बाहर बैठा था. उसी समय बहुत से घुड़सवार वहाँ आकर रुके और किसान से कुछ पूछा. उत्तरों से संतुष्ट होकर घुड़सवारों के नेता ने कहा – “शिवाजी ने आपको आमंत्रित किया है.”

यह सुनते ही किसान घबरा गया और बोला – “क्या बात है? मुझसे कोई अपराध हुआ है, जो शिवाजी ने हमें बुलाया है.”
सरदार ने कहा – “महाराज ने हमें तो केवल इतना ही बताया है कि आपके कढ़ी-भात के सबक के कारण ही स्वराज्य कायम हो सका है. अतः महाराज की इच्छा है कि आप उनके राज्याभिषेक में अवश्य पधारें.”

इस प्रकार एक किसान दंपत्ति की अनजानी सलाह ने शिवाजी महाराज को नयी योजना का सूत्र दे दिया जिसे अपनाकर उन्होंने मराठा साम्राज्य की स्थापना की.

 

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